Holy scriptures

Wednesday, May 20, 2020

वर्तमान समय में बेरोजगारी एक समाज में गरीबी का मुख्य कारण है।

बेरोजगारी समाज के लिए एक अभिशाप है। 
इससे न केवल व्यक्तियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है बल्कि बेरोजगारी पूरे समाज को भी प्रभावित करती है। कई कारक हैं जो बेरोजगारी का कारण बनते हैं। यहां इन कारकों की विस्तार से व्याख्या की गई और इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए संभावित समाधान बताये गये हैं।
भारत में बेरोजगारी को बढ़ाने वाले कारक

1.जनसंख्या में वृद्धि
देश की जनसंख्या में तेजी से होती वृद्धि बेरोजगारी के प्रमुख कारणों में से एक है।

2.मंदा आर्थिक विकास
देश के धीमे आर्थिक विकास के परिणामस्वरूप लोगों को रोजगार के कम अवसर प्राप्त होते हैं जिससे बेरोजगारी बढ़ती है।

3.मौसमी व्यवसाय
देश की आबादी का बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र में जुड़ा हुआ है। मौसमी व्यवसाय होने के कारण यह केवल वर्ष के एक निश्चित समय के लिए काम का अवसर प्रदान करता है।

4.औद्योगिक क्षेत्र की धीमी वृद्धि
देश में औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि बहुत धीमी है। इस प्रकार इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर सीमित हैं।
संतरामपालजी का सत्संग सुनकर लाखों लोग ज्ञान समझकर नाम उपदेश लिया और लाखों लोगों की कई प्रकार की समस्या का समाधान हुआ जैसे बेरोजगारी, नशा मुक्त, दहेज मुक्त, ऐसे कई प्रकार की बीमारी का समाधान हुआ है
पूर्ण गुरु से नाम उपदेश लेकर मर्यादा में रहते हुए आजीवन सत भक्ति करने से ही सर्व सुख ,आर्थिक मानसिक और शारीरिक सुख होता है। पूर्ण मोक्ष मिलता है।
इसलिए भक्ति करना ज़रूरी है।
अधिक जानकारी के लिए प्रतिदिन देखें साधना चैनल शाम 7.30 से 8.30 तक।
https://www.jagatgururampalji.org

Thursday, May 14, 2020

कन्या भ्रूण हत्या समाज के लिए एक कलंक!!

वर्तमान समय में कन्या भ्रूण हत्या बहुत ही तेजी से बढ़ रही हैं इलेक्ट्रॉनिक मशीन,
अल्ट्रासाउंड स्कैन जैसी लिंग परीक्षण जाँच के बाद जन्म से पहले माँ के गर्भ से लड़की के भ्रूण को समाप्त करने के लिये गर्भपात की प्रक्रिया को कन्या भ्रूण हत्या कहते हैं। कन्या भ्रूण या कोई भी लिंग परीक्षण भारत में गैर-कानूनी है। ये उन अभिवावकों के लिये शर्म की बात है जो सिर्फ बालक शिशु ही चाहते हैं साथ ही इसके लिये चिकित्सक भी खासतौर से गर्भपात कराने में मदद करते हैं।
1990 में चिकित्सा क्षेत्र में अभिभावकीय लिंग निर्धारण जैसे तकनीकी उन्नति के आगमन के समय से भारत में कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा मिला। हालांकि, इससे पहले, देश के कई हिस्सों में बच्चियों को जन्म के तुरंत बाद मार दिया जाता था। भारतीय समाज में, बच्चियों को सामाजिक और आर्थिक बोझ के रुप में माना जाता है इसलिये वो समझते हैं कि उन्हें जन्म से पहले ही मार देना बेहतर होगा।
कन्या भ्रूण हत्या का मुख्य कारण
कन्या भ्रूण हत्या के मुख्य कारण यह है कि वह लड़की की शादी में दहेज के रूप में एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है इस कारण वह पहले ही गर्भ में हत्या कर देते हैं
कन्या भ्रूण सदियों से चली आ रही है एक खास तौर पर उन परिवारों के लिए हैं जो केवल लड़का ही चाहते हैं हालांकि विभिन्न कारण और मान्यताएं कुछ परिवार में आज भी जारी है
कन्या भ्रूण हत्या रोकनेे के लिए सरकार के प्रयास
भारतीय दंड संहिता, 1860 के तहत प्रावधान : भारतीय दंड संहिता की धारा 312 कहती है: ‘जो कोई भी जानबूझकर किसी महिला का गर्भपात करता है जब तक कि कोई इसे सदिच्छा से नहीं करता है और गर्भावस्था का जारी रहना महिला के जीवन के लिए खतरनाक न हो, उसे सात साल की कैद की सजा दी जाएगी’। इसके अतिरिक्त महिला की सहमति के बिना गर्भपात (धारा 313) और गर्भपात की कोशिश के कारण महिला की मृत्यु (धारा 314) इसे एक दंडनीय अपराध बनाता है। धारा 315 के अनुसार मां के जीवन की रक्षा के प्रयास को छोड़कर अगर कोई बच्चे के जन्म से पहले ऐसा काम करता है जिससे जीवित बच्चे के जन्म को रोका जा सके या पैदा होने का बाद उसकी मृत्यु हो जाए, उसे दस साल की कैद होगी  धारा 312 से 318  गर्भपात के अपराध पर सरलता से विचार करती है जिसमें गर्भपात करना, बच्चे के जन्म को रोकना, अजन्मे बच्चे की हत्या करना (धारा 316), नवजात शिशु को त्याग देना (धारा 317), बच्चे के मृत शरीर को छुपाना या इसे चुपचाप नष्ट करना (धारा 318)। हालाँकि भ्रूण हत्या या शिशु हत्या शब्दों का विशेष तौर पर इस्तेमाल नहीं किया गया है , फिर भी ये धाराएं दोनों अपराधों को समाहित करती हैं।
कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए संत रामपाल जी महाराज के पूर्ण प्रयास:
संत रामपाल जी महाराज के प्रयास 
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
बेटी एक अनमोल रत्न है बेटी बचेगी तो ही सृष्टि चलेगी। और यह कार्य और कोई नई केवल संत रामपाल जी महाराज कर रहे हैं
संतरामपालजी का सत्संग सुनकर लाखों लोग ज्ञान समझकर नाम उपदेश लिया और लाखों लोगों की कई प्रकार की समस्या का समाधान हुआ जैसे बेरोजगारी, नशा मुक्त, दहेज मुक्त, ऐसे कई प्रकार की बीमारी का समाधान हुआ है संत रामपाल जी महाराज से उपदेश लेने के बाद सभी बुराइयों का त्याग हो जाता है और संत रामपाल जी द्वारा लाखों दहेज रहित शादियां हो रही हैं संत रामपाल जी महाराज से उपदेश लेने के बाद किसी प्रकार का ना दहेज लेते हैं और ना ही दहेज देते हैं
पूर्ण गुरु से नाम उपदेश लेकर मर्यादा में रहते हुए आजीवन सत भक्ति करने से ही सर्व सुख ,आर्थिक मानसिक और शारीरिक सुख होता है। पूर्ण मोक्ष मिलता है।
इसलिए भक्ति करना ज़रूरी है।
अधिक जानकारी के लिए प्रतिदिन देखें साधना चैनल शाम 7.30 से 8.30 तक
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Wednesday, May 13, 2020

समाज में बेरोजगारी एक अभिशाप !

वर्तमान समय में बेरोजगारी एक समाज के लिए अभिशाप है।
बेरोजगारी किसी भी देश के विकास में प्रमुख बाधाओं में से एक है। ... 
विकासशील देशों के सामने आने वाली मुख्य समस्याओं में से एक बेरोजगारी है। यह केवल देश के आर्थिक विकास में खड़ी प्रमुख बाधाओं में से ही एक नहीं बल्कि व्यक्तिगत और पूरे समाज पर भी एक साथ कई तरह के नकारात्मक प्रभाव डालती है।
बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है। शिक्षा की कमी, रोजगार के अवसरों की कमी, मंदा आर्थिक विकास , औद्योगिक क्षेत्र की धीमी वृद्धि ,कौशल की कमी, प्रदर्शन संबंधी मुद्दे और बढ़ती आबादी सहित कई कारक भारत में इस समस्या को बढ़ाने में अपना योगदान देते हैं।
बेरोजगारी को कम करने के लिया सरकार भी अपना प्रयास कर रही है लेकिन बेरोजगारी में वृद्धि हो रही है सरकार निम्न बिंदुओं पर प्रयास कर रही है ...
1.जनसंख्या पर नियंत्रण
यह सही समय है जब भारत सरकार देश की आबादी को नियंत्रित करने के लिए कठोर कदम उठाए।
2.शिक्षा व्यवस्था
भारत में शिक्षा प्रणाली कौशल विकास की बजाय सैद्धांतिक पहलुओं पर केंद्रित है। कुशल श्रमशक्ति उत्पन्न करने के लिए प्रणाली को सुधारना होगा।
3.औद्योगिकीकरण
लोगों के लिए रोज़गार के अधिक अवसर बनाने के लिए सरकार को औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने चाहिए।
4.विदेशी कंपनियां
सरकार को रोजगार की अधिक संभावनाएं पैदा करने के लिए विदेशी कंपनियों को अपनी इकाइयों को देश में खोलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
5.रोजगार के अवसर
एक निश्चित समय में काम करके बाकि समय बेरोजगार रहने वाले लोगों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा किए जाने चाहिए।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा बेरोजगारी कम करने के प्रयास
संतरामपालजी का सत्संग सुनकर लाखों लोग ज्ञान समझकर नाम उपदेश लिया और लाखों लोगों की कई प्रकार की समस्या का समाधान हुआ जैसे बेरोजगारी, नशा मुक्त, दहेज मुक्त, ऐसे कई प्रकार की बीमारी का समाधान हुआ है
पूर्ण गुरु से नाम उपदेश लेकर मर्यादा में रहते हुए आजीवन सत भक्ति करने से ही सर्व सुख ,आर्थिक मानसिक और शारीरिक सुख होता है। पूर्ण मोक्ष मिलता है।
इसलिए भक्ति करना ज़रूरी है।
अधिक जानकारी के लिए प्रतिदिन देखें साधना चैनल शाम 7.30 से 8.30 तक।
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Friday, May 8, 2020

पाप विनाशक प्रभु कोन??


पाप विनाशक कबीर प्रभु है
सम्पूर्ण शांति दायक, कविरंघारिसि = कबीर परमेश्वर (अंघ) पाप का (अरि) शत्रु (असि) है अर्थात् पाप विनाशक कबीर है। बन्धन का शत्रु अर्थात् बन्दी छोड़ कबीर परमेश्वर है।
- यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32
ऋग्वेद मंडल 10 सूक्त 161 मंत्र 2 में प्रमाण है कि परमात्मा अपने भक्तों के संकट निवारण करता है। यदि मृत्यु भी आ जाए तो भी उसको टालकर अपने भक्त को जीवित करके सौ वर्ष जीवन प्रदान कर देता है।
परमात्मा कबीर साहेब पाप विनाशक हैं
यजुर्वेद अध्याय 8 मन्त्र 13 में कहा गया है कि परमात्मा पाप नष्ट कर सकता है। संत रामपाल जी महाराज जी से उपदेश लेने व मर्यादा में रहने वाले भक्त के पाप नष्ट हो जाते हैं।
अधिक जानकारी के लिए शाम को प्रतिदिन देखें साधना चैनल 7.30 से 8.30 तक।

Thursday, May 7, 2020

नशा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है फिर शरीर का नाश हृदय है। शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं फेफड़े, लीवर, गुर्दे, हृदय। शराब सबसे प्रथम इन चारों अंगों को खराब करती है।
नशा गृह क्लेश को जन्म देती है व आर्थिक, शारीरिक, सामाजिक बदहाली अपने साथ लेकर आती है।
इससे दूरी रखना ही समझदारी है।यदि आप नशे की लत नहीं छोड़ पा रहे हैं और नशा मुक्ति केंद्र से भी आपको इस बारे में सफलता नहीं मिली है।
तो निराश न हों संत रामपाल जी महाराज से उपदेश लेकर आप इसे बड़ी आसानी से छोड़ सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिए आप प्रतिदिन शाम को 7.30 से 8.30 तक साधना चैनल पर संत रामपाल जी महाराज का सत्संग सुनें।

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Wednesday, May 6, 2020

कोरोना का इलाज

*क्या है कोरोना वायरस?*

कोरोना वायरस एक नई महामारी है जो चीन से फैल रही है। इस महामारी ने चीन में ही नहीं अपितु पूरी दुनिया में हाहाकार मचा कर रखा हुआ है। यह संक्रमण तेजी से कई देशों में फैल रहा है तथा अभी तक कई दर्जनों देश जैसे अमेरिका, चीन, थाईलैंड,  हांगकांग, जापान, दक्षिण कोरिया, नेपाल, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, श्रीलंका आदि इस प्रकोप की चपेट में आ चुके हैं। भारत में भी कई शहरों राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और मोहाली आदि में इस वायरस से ग्रसित लोग पाए गए हैं जिनको आइसोलेशन में रखा गया है। यह बिल्कुल नई किस्म का वायरस है और यह वायरस जानवरों में पाया जाता है। इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान शहर में शुरू हुआ था।



अभी तक इस वायरस से मरने वालों की संख्या 130 पार कर गई है अथवा संक्रमित मरीजों की संख्या 6000 तक पहुंच चुकी है। यह एक बहुत ही खतरनाक वायरस है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह वायरस 2002-2003 में फैले सार्स वायरस से भी अधिक घातक है।



 *कैसे फैलता है कोरोना वायरस?*

जो लोग मांस  खाते हैं, वह बहुत जल्दी इसके  संक्रमण में आते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह वायरस जहां चीन में मीट मांस की खुली दुकाने हैं और जहां पर अधिकतर  सी-फूड (समुद्र के जीव) मिलता है, वहां से पनपा है। इसी वजह से वहां पर सी-फूड मार्केट को फिलहाल अभी के लिए बंद कर दिया गया है ताकि संक्रमण को कम किया जा सके।

 *कोरोना वायरस के क्या  लक्षण हैं?*

इस वायरस के लक्षण चार से पांच दिन बाद दिखने लगते हैं। इस बीमारी के लक्षण आम फ्लू की तरह ही होते हैं इसलिए इसकी पहचान कर पाना मुश्किल होता है। इन लक्षणों में सिर दर्द, खांसी, गले में खराश, छींक आना अस्थमा का बिगड़ना, थकान महसूस करना और सांस लेने में तकलीफ होना आदि हैं।

 *कोरोना वायरस का इलाज क्या है?*

कोरोना वायरस से निजात पाने के लिए अभी तक किसी भी प्रकार की वैक्सीन नहीं बनी है। परन्तु विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस वायरस से बचने के लिए हेल्थ एडवायजरी जारी की है। इसमें यह बताया गया है कि सर्दी-जुखाम और निमोनिया से पीड़ित लोगों के संपर्क में आने से जितना हो बचना चाहिए, साथ ही अपने आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें। हाथों को बार-बार साबुन से अच्छी तरह से धोएं और अधिकतर मास्क पहनकर ही बाहर निकलें। इसके अलावा जानवरों से भी दूर रहें।

इतनी प्रयासों के बावजूद भी इस वायरस की चपेट में आने की संभावना बहुत है, क्योंकि यह वायरस एक संक्रमित व्यक्ति से आगे बहुत जल्दी फैलता है। मांस खाना, मदिरा का सेवन करना और अन्य कृत्यों का चलन पश्चिमी संस्कृति में ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति में भी घर कर रहे हैं, जो सभी बीमारियों की जड़ है।

अभी तक कितने ही वायरस जैसे कि स्वाइन फ्लू, इबोला वायरस, सार्स और अब कोरोना वायरस इत्यादि सभी जानवरों से होने वाले वायरस पाए गए हैं। जहां भी अपने स्वाद के लिए जानवरों को काटा जाता है, वहां से यह बीमारियां  पनपती हैं।

परमात्मा के विधान के अनुसार  कहीं भी मांस खाने का उल्लेख नहीं है। यहां तक कि सभी धर्मग्रंथों के अनुसार मांस खाना निषेध है।