वर्तमान समय में कन्या भ्रूण हत्या बहुत ही तेजी से बढ़ रही हैं इलेक्ट्रॉनिक मशीन,
अल्ट्रासाउंड स्कैन जैसी लिंग परीक्षण जाँच के बाद जन्म से पहले माँ के गर्भ से लड़की के भ्रूण को समाप्त करने के लिये गर्भपात की प्रक्रिया को कन्या भ्रूण हत्या कहते हैं। कन्या भ्रूण या कोई भी लिंग परीक्षण भारत में गैर-कानूनी है। ये उन अभिवावकों के लिये शर्म की बात है जो सिर्फ बालक शिशु ही चाहते हैं साथ ही इसके लिये चिकित्सक भी खासतौर से गर्भपात कराने में मदद करते हैं।
1990 में चिकित्सा क्षेत्र में अभिभावकीय लिंग निर्धारण जैसे तकनीकी उन्नति के आगमन के समय से भारत में कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा मिला। हालांकि, इससे पहले, देश के कई हिस्सों में बच्चियों को जन्म के तुरंत बाद मार दिया जाता था। भारतीय समाज में, बच्चियों को सामाजिक और आर्थिक बोझ के रुप में माना जाता है इसलिये वो समझते हैं कि उन्हें जन्म से पहले ही मार देना बेहतर होगा।
कन्या भ्रूण हत्या के मुख्य कारण यह है कि वह लड़की की शादी में दहेज के रूप में एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है इस कारण वह पहले ही गर्भ में हत्या कर देते हैं
कन्या भ्रूण सदियों से चली आ रही है एक खास तौर पर उन परिवारों के लिए हैं जो केवल लड़का ही चाहते हैं हालांकि विभिन्न कारण और मान्यताएं कुछ परिवार में आज भी जारी है
भारतीय दंड संहिता, 1860 के तहत प्रावधान : भारतीय दंड संहिता की धारा 312 कहती है: ‘जो कोई भी जानबूझकर किसी महिला का गर्भपात करता है जब तक कि कोई इसे सदिच्छा से नहीं करता है और गर्भावस्था का जारी रहना महिला के जीवन के लिए खतरनाक न हो, उसे सात साल की कैद की सजा दी जाएगी’। इसके अतिरिक्त महिला की सहमति के बिना गर्भपात (धारा 313) और गर्भपात की कोशिश के कारण महिला की मृत्यु (धारा 314) इसे एक दंडनीय अपराध बनाता है। धारा 315 के अनुसार मां के जीवन की रक्षा के प्रयास को छोड़कर अगर कोई बच्चे के जन्म से पहले ऐसा काम करता है जिससे जीवित बच्चे के जन्म को रोका जा सके या पैदा होने का बाद उसकी मृत्यु हो जाए, उसे दस साल की कैद होगी धारा 312 से 318 गर्भपात के अपराध पर सरलता से विचार करती है जिसमें गर्भपात करना, बच्चे के जन्म को रोकना, अजन्मे बच्चे की हत्या करना (धारा 316), नवजात शिशु को त्याग देना (धारा 317), बच्चे के मृत शरीर को छुपाना या इसे चुपचाप नष्ट करना (धारा 318)। हालाँकि भ्रूण हत्या या शिशु हत्या शब्दों का विशेष तौर पर इस्तेमाल नहीं किया गया है , फिर भी ये धाराएं दोनों अपराधों को समाहित करती हैं।
कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए संत रामपाल जी महाराज के पूर्ण प्रयास:
संत रामपाल जी महाराज के प्रयास
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
बेटी एक अनमोल रत्न है बेटी बचेगी तो ही सृष्टि चलेगी। और यह कार्य और कोई नई केवल संत रामपाल जी महाराज कर रहे हैं
संतरामपालजी का सत्संग सुनकर लाखों लोग ज्ञान समझकर नाम उपदेश लिया और लाखों लोगों की कई प्रकार की समस्या का समाधान हुआ जैसे बेरोजगारी, नशा मुक्त, दहेज मुक्त, ऐसे कई प्रकार की बीमारी का समाधान हुआ है संत रामपाल जी महाराज से उपदेश लेने के बाद सभी बुराइयों का त्याग हो जाता है और संत रामपाल जी द्वारा लाखों दहेज रहित शादियां हो रही हैं संत रामपाल जी महाराज से उपदेश लेने के बाद किसी प्रकार का ना दहेज लेते हैं और ना ही दहेज देते हैं
पूर्ण गुरु से नाम उपदेश लेकर मर्यादा में रहते हुए आजीवन सत भक्ति करने से ही सर्व सुख ,आर्थिक मानसिक और शारीरिक सुख होता है। पूर्ण मोक्ष मिलता है।
इसलिए भक्ति करना ज़रूरी है।
अधिक जानकारी के लिए प्रतिदिन देखें साधना चैनल शाम 7.30 से 8.30 तक
https://www.jagatgururampalji.org
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